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डांस से जीता 5 रुपये इनाम, हिंदी सिनेमा को दीं 3 कल्ट क्लासिक जिनका नहीं कोई जोड़, नींद की गोलियों की ओवरडोज से हुई मौत

गुरुदत्त ने 1944 में भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा और प्रभात स्टूडियो में कोरियोग्राफर के तौर पर काम किया. वहां उनकी दोस्ती देव आनंद और रहमान खान से दोस्ती हुई, जिनसे वे फिल्म 'हम एक हैं' (1946) के दौरान मिले थे.
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