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नीरज कौशल का कॉलम:जन्मसिद्ध नागरिकता के सवाल पर गम्भीर चर्चा की जानी चाहिए
हम दूसरे देशों से अपेक्षा करते हैं कि वे भारतीयों का स्वागत करें, उन्हें स्थायी आवास और अंततः नागरिकता भी प्रदान करें। लेकिन हम शायद ही कभी सवाल उठाते हैं कि क्या भारत के अपने नागरिकता कानूनों में भी वैसा ही खुलापन है? आप्रवासियों के अधिकार
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