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क्या चेंबूर त्रासदी में बिहान की मौत को टाला जा सकता था? 'पेड़ गिर सकता है' कहने वाले 2 अक्षरों को किसने नजरअंदाज किया?

पहले के पत्राचार से पता चलता है कि भले ही बिहान वापस न आया हो, लेकिन उसकी मृत्यु को टाला जा सकता था। क्या बिहान की मौत सिर्फ एक दुर्घटना थी या लापरवाही की कीमत?
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