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PROBLEM
INDIA
पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:माताएं-बहनें जहां काम करती हैं, आंगन-सा माहौल बन जाता है
भारत में आंगन पारिवारिक सामूहिकता का प्रतीक है। साहित्यकारों ने तो आंगन को नारियों की दुनिया कहा है। तुलसी तो आंगन की महारानी है ही। कुछ ऋषियों ने मन को भी आंगन का रूपक दिया है। तुलसीदास जी लिखते हैं- बरनि न जाइ रुचिर अँगनाइ, जहँ खेलहिं नित
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